अपनी बालकृति
"हँसता गाता बचपन" से
![]()
एक बालकविता
"रंग-बिरंगे छाते"
धूप और बारिश से,
जो हमको हैं सदा बचाते।
छाया देने वाले ही तो,
कहलाए जाते हैं छाते।।
आसमान में जब घन छाते,
तब ये हाथों में हैं आते।
रंग-बिरंगे छाते ही तो,
हम बच्चों के मन को भाते।।
तभी अचानक आसमान से,
|
समर्थक
Showing posts with label रंग-बिरंगे छाते. Show all posts
Showing posts with label रंग-बिरंगे छाते. Show all posts
Sunday, September 1, 2013
"रंग-बिरंगे छाते" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
Labels:
बालकविता,
रंग-बिरंगे छाते,
हँसता गाता बचपन से
Subscribe to:
Posts (Atom)





