अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन" से

"भैंस हमारी बहुत निराली"
भैंस हमारी बहुत निराली।
खाकर करती रोज जुगाली।।
इसका बच्चा बहुत सलोना।
प्यारा सा है एक खिलौना।।
बाबा जी इसको टहलाते।
गर्मी में इसको नहलाते।।
गोबर रोज उठाती अम्मा।
सानी इसे खिलाती अम्मा।
गोबर की हम खाद बनाते।
खेतों में सोना उपजाते।।
भूसा-खल और चोकर खाती।
सुबह-शाम आवाज लगाती।।
कहती दूध निकालो आकर।
धन्य हुए हम इसको पाकर।।
सीधी-सादी, भोली-भाली।
लगती सुन्दर हमको काली।।
बहुत सुंदर कविता...आभार सर! आनंद आ गया।
ReplyDeleteवाह वाह ...बहुत बढ़िया
ReplyDeleteबहुत बढ़िया :)
ReplyDeleteबढ़िया रचना , शास्त्री जी बढ़िया कविता , आ. धन्यवाद !
ReplyDeleteनवीन प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ सच्चा साथी ~ ) - { Inspiring stories -part - 6 }
~ ज़िन्दगी मेरे साथ -बोलो बिंदास ! ~( एक ऐसा ब्लॉग जो जिंदगी से जुड़ी हर समस्या का समाधान बताता हैं )
अभी बियाई दिख रही है.. .
ReplyDeleteभैंस और उसका बच्चा बहुत अच्छा लगा
बच्चा किसी भी जीव-जंतु का हो या इंसान का बहुत प्यारा होता है। .
Kya baat hai.
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