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Sunday, September 18, 2011

"मेरी गुड़िया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मम्मी देखो मेरी डॉल।
खेल रही है यह तो बॉल।।

पढ़ना-लिखना इसे न आता।
खेल-खेलना बहुत सुहाता।।

कॉपी-पुस्तक इसे दिलाना।
विद्यालय में नाम लिखाना।।


रोज सवेरे मैं गुड़िया को,
ए.बी.सी.डी. सिखलाऊँगी।
अपने साथ इसे भी मैं तो,
विद्यालय में ले जाऊँगी।।

7 comments:

  1. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 19-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  2. बहुत प्यारी कविता .... प्यारे फोटोस

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  3. पढना लिखना तनिक न आये |
    गुड़िया तो बुढ़िया हो जाए ||
    जायेगी ससुराल सास को --
    पढना लिखना कौन सिखाये ??
    सीख फटाफट ए बी सी डी-
    गिनती-टेबुल जोड़ घटाए--
    नीति नियम गुरुजन का आदर-
    ज्ञान पाय विज्ञान पढाये ||
    कम्पूटर इंटरनेट ब्लोगिंग-
    दुनिया को सद-राह दिखाए ||
    भोली गुड़िया प्यारी गुड़िया
    प्यारी बन सबको हरसाए ||

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  4. bal sahitya ko padhne ka apna hi anand hai..bachpan ki yaad dilata hai..behatarin

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  5. बहुत ही प्यारी रचना है ...

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  6. प्यारी सी गुड़िया... प्यारी सी कविता!!!

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