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Tuesday, September 20, 2011

"विद्यालय लगता है प्यारा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

विद्या का भण्डार भरा है जिसमें सारा।
मुझको अपना विद्यालय लगता है प्यारा।।

नित्य नियम से विद्यालय में, मैं पढ़ने को जाता हूँ।
इण्टरवल जब हो जाता मैं टिफन खोल कर खाता हूँ।

खेल-खेल में दीदी जी विज्ञान गणित सिखलाती हैं।
हिन्दी और सामान्य-ज्ञान भी ढंग से हमें पढ़ाती हैं।।

कम्प्यूटर में सर जी हमको रोज लैब ले जाते है।
माउस और कर्सर का हमको सारा भेद बताते हैं।।

कम्प्यूटर में गेम खेलना सबसे ज्यादा भाता है।
इण्टरनेट चलाना भी मुझको थोड़ा सा आता है।।

जिनका घर है दूर वही बालक रिक्शा से आते हैं।
जिनका घर है बहुत पास वो पैदल-पैदल जाते हैं।।

पढ़-लिख कर मैं अच्छे-अच्छे काम करूँगा।
दुनिया में अपने भारत का सबसे ऊँचा नाम करूँगा।।

7 comments:

  1. bahut pyaari bachchon ke man ki kavita.

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  2. पढ़-लिख कर मैं अच्छे-अच्छे काम करूँगा।
    दुनिया में अपने भारत का सबसे ऊँचा नाम करूँगा।।

    har koe yahe cahata hai
    keya hota hai keya

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  3. विद्यालय प्रतिभाओं के परिष्कार का केन्द्र होता है , जहाँ राष्ट्र के भाग्य विधाता तैयार किये जाते है , जो अपने आचरण से राष्ट्र को नव दिशा - दशा देते है । उनमें नव निर्माण की रचनात्मक भावना होती है । जीवन के यौवन काल में भावनाओं का उद्वेग होता है , उन्हें सही दिशा देना , उनमें जीवन के प्रति नव चेतना उत्पन्न करना बहुत आवश्यक है ।
    सुन्दर , प्रेरक कविता ...... आभार ।

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  4. विद्यालय प्रतिभाओं के परिष्कार का केन्द्र होता है , जहाँ राष्ट्र के भाग्य विधाता तैयार किये जाते है , जो अपने आचरण से राष्ट्र को नव दिशा - दशा देते है । उनमें नव निर्माण की रचनात्मक भावना होती है । जीवन के यौवन काल में भावनाओं का उद्वेग होता है , उन्हें सही दिशा देना , उनमें जीवन के प्रति नव चेतना उत्पन्न करना बहुत आवश्यक है ।
    सुन्दर , प्रेरक कविता ...... आभार ।

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  5. बहुत सुन्दर कविता!!!

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  6. विद्यालय तो होता ही है प्‍यारा। और उतनी ही प्‍यारी कविता।

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    मायावी मामा?
    रूमानी जज्‍बों का सागर..

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  7. सुंदर कविता!!
    क्या मै यह कविता अपने बेटे को स्कुल में सुनाने के लिये इस्तेमाल कर सकती हुं?

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