अपनी बालकृति
"हँसता गाता बचपन" से
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एक बालकविता
♥ यह है अपना सच्चा भारत ♥
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सुन्दर-सुन्दर खेत हमारे।
बाग-बगीचे प्यारे-प्यारे।।
पर्वत की है छटा निराली।
चारों ओर बिछी हरियाली।।
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सूरज किरणें फैलाता है।
छटा अनोखी बिखराता है।।
तम हट जाता, जग जगजाता।
जन दिनचर्या में लग जाता।।
चहक उठे हैं घर-चौबारे।
महक उठे कच्चे-गलियारे।।
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गइया जंगल चरने जाती।
हरी घास मन को ललचाती।।
नहीं बनावट, नहीं प्रदूषण।
यहाँ सरलता है आभूषण।।
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खड़ी हुई मजबूत इमारत।
यह है अपना सच्चा भारत।।
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समर्थक
Sunday, September 8, 2013
♥ यह है अपना सच्चा भारत ♥ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
Labels:
बालकविता,
यह है अपना सच्चा भारत,
हँसता गाता बचपन
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Bahut sundar
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