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Thursday, March 27, 2014

"आँगनबाड़ी के हैं तारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बालकृति 
"हँसता गाता बचपन" से
बालकविता
"आँगनबाड़ी के हैं तारे"
 
आँगन बाड़ी के हैं तारे।
बालक हैं  ये प्यारे-प्यारे।।
 
आओ इनका मान करें हम।
सुमनों का सम्मान करें हम।।
 
बाल दिवस हम आज मनाएँ।
नेहरू जी को शीश नवाएँ।।
 
जो थे भारत भाग्य विधाता।
बच्चों से रखते वो नाता।।
 
सबसे अच्छे जग से न्यारे।
बच्चों के हैं चाचा प्यारे।।

4 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (28.03.2014) को "
    जय बोलें किसकी" (चर्चा अंक-1565)"
    पर लिंक की गयी है, धन्यबाद।

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  2. बहुत प्यारे-प्यारे तारे हैं ..
    बहुत सुन्दर बाल रचना ..

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