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Monday, December 9, 2013

"कच्चे घर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

अपनी बाल कृति "हँसता गाता बचपन" से
एक बालकविता
"कच्चे घर"
सुन्दर-सुन्दर सबसे न्यारा।
प्राची का घर सबसे प्यारा।।

खुला-खुला सा नील गगन है।
हरा-भरा फैला आँगन है।।

पेड़ों की छाया सुखदायी।
सूरज ने किरणें चमकाई।।

कल-कल का है नाद सुनाती।
निर्मल नदिया बहती जाती।।

तन-मन खुशियों से भर जाता।
यहाँ प्रदूषण नहीं सताता।।

लोग पुराने यह कहते हैं।
 कच्चे घर अच्छे रहते हैं।।

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना

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  2. बहुत प्यारा गीत

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगलवार १०/१२/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ स्वागत है

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